पिछले 24 घंटे में कोरोना के 38 हजार 310 नए केस सामने आए हैं. कल से मुकाबले नए केस में 15% की गिरावट है. देश में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 83 लाख के करीब पहुंच गई है.
सितंबर में पीक बीत जाने के बाद से देश में लगातार कोरोना के नए मामलों में कमी देखी जा रही है. एक्सपर्ट का कहना है कि आंकड़े भले ही कम हो रहे हैं लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है. हमें अभी भी उतनी सावधानी और सतर्कता रखने की जरूरत है. बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर जाएं और मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को ही कोरोना की दवाई समझें.
महाराष्ट्र कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बना हुआ है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि महाराष्ट्र में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका नहीं है, लेकिन अगर ऐसी परिस्थिति उभरती है तो राज्य इससे निपटने को लेकर तैयार है. इस बीच, सरकार ने स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए सबसे पहले कोविड-19 वैक्सीन की व्यवस्था करने का फैसला किया है.
दिल्ली के कई अस्पतालों में वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड की कमी
राजधानी दिल्ली में फिलहाल कोरोनावायरस संक्रमण की एक और लहर देखी जा रही है. इस बीच शहर के कई निजी अस्पतालों और दो सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर के साथ कोई आईसीयू बेड नहीं बचा है, जो गंभीर रोगियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.
दिल्ली सरकार की एप्लिकेशन के अनुसार, शहर भर में लगभग 68 प्रतिशत वेंटिलेटर वाले आईसीयू बेड भरे हुए हैं, जबकि बिना वेंटिलेटर के 69 प्रतिशत आईसीयू बेड भरे हुए हैं. हालांकि इसमें एक सुकून की बात यह भी है कि सामान्य कोविड-19 बेड के केवल 42 प्रतिशत ही फिलहाल उपयोग में हैं.
कोरोनावायरस से संबंधित जानकारी के लिए सरकार के मोबाइल एप के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल 1,244 में से वेंटिलेटर के साथ लगभग 399 आईसीयू बेड खाली हैं. वहीं वेंटिलेटर के बिना कुल 1,921 में से 604 आईसीयू बेड खाली हैं. इसके अलावा 15,790 में से 9,076 सामान्य कोविड-19 बेड उपलब्ध हैं.
यह भी चिंताजनक बात है कि दिल्ली के 38 निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर के साथ कोई भी आईसीयू बेड खाली नहीं है. दिल्ली सरकार के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल और केंद्र सरकार के उत्तर रेलवे अस्पताल में भी वेंटिलेटर के साथ कोई भी आईसीयू बेड खाली नहीं है.
