मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम से मिली ई-शिक्षा से महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर
रायगढ़, 6 फरवरी 2020/ एक बेटी ने अपने मां को आत्मविश्वास की नई राह दिखाई है। संचार क्रांति के इस दौर में डिजिटल साक्षर बनने के लिए कक्षा में अपने साथ ही मां को भी दाखिला दिलवाया। फिर मूल्यांकन में एक साथ सफलता पायी। खुशबू ने अपनी मां श्रीमती गीता साहू जो कि आंगनबाड़ी सहायिका है, उन्हें शासन द्वारा ‘गढ़बो डिजिटल छत्तीसगढ़ अभियान ‘ के तहत चलायी जा रही मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम में अपने साथ प्रवेश लेने के लिए प्रेरित किया। जहां मां और बेटी दोनों ने डिजिटल डिवाइस जैसे कम्प्यूटर, टेबलेट, मोबाईल का उपयोग करना तथा इंटरनेट के माध्यम से ई-मेल भेजना व प्राप्त करना, मोबाइल में एप के द्वारा नेट बैंकिंग, टे्रन टिकिट बुक करना, मैप तथा सोशल मीडिया का उपयोग करना सीखा। गीता साहू बताती है डिजिटल साक्षर बनने के बाद उनमें आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता बढ़ी है तथा सूचना क्रांति की तकनीकों के प्रति जो अनभिज्ञता व हिचक थी वह दूर हुई है।
डिजिटल साक्षर क्लासरूम में मिल रही है शिक्षा
गृहिणी सफाई कामगार, महिला श्रमिक, शाला त्यागी बालिकाएं ले रही है ई-शिक्षा
रायगढ़ में डिजिटल साक्षरता की कक्षाएं बैच अनुसार महिलाओं के निवास के समीप सामुदायिक भवन या किसी शासकीय भवन में दोपहर 11 से 5 बजे के बीच महिलाओं की सुविधा अनुसार किया जा रहा है। दो घंटे की कक्षाएं हफ्ते में 6 दिन संचालित की जाती है जहां पाठ्यक्रम अनुसार डिजिटल एजुकेटर्स के द्वारा क्लासेस ली जाती है। एक बैच में 50 महिलाएं प्रवेश ले सकती है। पाठ्यक्रम समाप्ति पर शिक्षार्थियों का ऑनलाईन मूल्यांकन किया जाता है। सफल शिक्षार्थी को डिजिटल साक्षरता का प्रमाण-पत्र तथा 600 रुपए शिक्षार्थी भत्ता मिलता है। असफल शिक्षार्थी जब तक सफल न हो अगली परीक्षा में मूल्यांकन के लिए बैठ सकता है। रायगढ़ में कार्यक्रम के तहत 8 बैच में 210 महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाया गया है। कार्यक्रम में प्रवेश हेतु गृहिणी, सफाई कामगार, महिला श्रमिक, शाला त्यागी बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
डिजिटल साक्षर बनकर अब करूंगी बीसीए की पढ़ाई
गीता महंत जो कि डिजिटल साक्षर मूल्यांकन में सफल शिक्षार्थी रही है, वे बताती है अब आगे बीसीए की पढ़ाई करने की इच्छा रखती है, यहां सीखी बातों को जब पति को बताया तो वे मेरी समझ व उत्साह देख मुझे आगे पढ़ाने के लिए सहर्ष तैयार हो गए।
मोबाईल एप्लीकेशन उपयोग करने में अब नहीं होती है कठिनाई
गृहणी श्रीमती कुसुमलता चतुर्वेदी ने बताया कि अब आसानी से मोबाईल एप्लीकेशन उपयोग कर सकती हूं। सोशल मीडिया चलाना, यूट्यूब के माध्यम से कई नई जानकारियां पता चलती है। जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मेरी बेटी भारती और जेठानी देवकी हम तीनों ने इस मूल्यांकन में साथ में सफलता पायी है।
ई-साक्षरता के साथ श्रेष्ठ पालकत्व का गुण भी सीखा यहां
श्रीमती दुरपति बरेठ जिनकी 6 माह की एक बिटिया है, वे अपना अनुभव बांटते हुए कहती है कि इस कक्षा के माध्यम से ई-साक्षरता के साथ श्रेष्ठ पालकत्व की भी सीख मिली, जो मेरे जैसी एक छोटी बच्ची की मां के लिए अत्यंत लाभदायक है। दुरपति बरेठ अपने बैच की टॉपर भी है।
मोबाईल से कान्फ्र्रेंस कॉल करना और मैप से लोकेशन ढूढऩा हुआ आसान
नेहा दत्ता जो कि एक छात्रा है ने बताया कि अब कान्फ्रेंस कॉल करना व मैप से लोकेशन ढूढऩा जैसे कार्य सरल हुए है। यूट्यूब में अपनी पढ़ाई से संबंधित विडियो देखकर अपनी कक्षा में मेरा प्रदर्शन सुधरा है।
अपने काम के लिए अब नहीं होना पड़ता किसी पर निर्भर
श्रीमती सोनिया डनसेना ने बताया कि उनके घर में कम्प्यूटर व इंटरनेट की सुविधा है पर ज्ञान के अभाव में वह इनका उपयोग नहीं कर पाती थी। अब इस कार्यक्रम के माध्यम से डिजिटल डिवाईस चलाना सीखने के बाद अपने काम खुद कर लेती हूं, किसी पर निर्भर नहीं होना पड़ता है। उनकी देवरानी श्रीमती संतोषी डनसेना भी उनके साथ इस कार्यक्रम में सफल हुई है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन ने मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से शहरी क्षेत्रों के 14 से 60 वर्ष के डिजीटल असाक्षर महिलाएं जो ई-शिक्षा से वंचित है उनको डिजिटल उपकरणों के उपयोग का व्यवहारिक ज्ञान देने के साथ ही शासकीय योजनाओं के डिजिटलीकरण से परिचित कराकर कार्य को सरल व सुगम बनाने हेतु यह योजना प्रारंभ की है। इसके माध्यम से वंचित वर्ग को ई-साक्षरता अंतर्गत नेट बैकिंग, वित्तीय साक्षरता तथा ई-गवर्नेंस की बहुआयामी गतिविधियों की जानकारी मिलेगी। 30 दिन के पाठ्यक्रम में शिक्षार्थियों को ई-साक्षरता के अतिरिक्त वित्तीय साक्षरता, कानूनी साक्षरता, चुनावी साक्षरता, श्रेष्ठ पालकत्व, व्यक्तित्व विकास, आत्मरक्षा के गुर, जीवन लक्ष्य निर्धारण, कैरियर गाईडेंस, सूचना खिड़की-केन्द्र व राज्य शासन की योजनाओं के साथ जनकल्याणकारी विषयों पर जानकारी दी जाएगी। जिससे डिजीटल साक्षर बनकर महिलाएं कैशलेस लेनदेन, ई-भुगतान, डिजिटल लॉकर का उपयोग करने व दस्तावेजों की ई-शेयरिंग करने में सक्षम होंगे। ऑनलाईन फार्म भरना, शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना व लाभ उठाना आदि कर सकेंगे।
