रायगढ। एनटीपीसी रायगढ़ से निकलने वाली फ्लाई ऐश की सप्लाई में करोड़ों रुपये का बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। दस्तावेजों में फ्लाई ऐश को रायपुर भेजे जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में फ्लाई ऐश रायगढ़ के आसपास के इलाकों में ही अनधिकृत रूप से डंप की जा रही है। इस गोरखधंधे में ट्रांसपोर्टरों के साथ-साथ एनटीपीसी के कुछ कर्मचारियों की भी संलिप्तता उजागर हुई है।
एक ही गाड़ी के दो-दो नंबर, जीपीएस से हुआ भंडाफोड़
जांच में चैंकाने वाले बात सामने आए हैं कि ट्रांसपोर्टर्स एक ही ट्रक को अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नंबरों के तहत दिखा रहे हैं। यही नहीं, ळच्ै डेटा से भी साफ हुआ है कि कई वाहन जिनकी रसीदों में रायपुर तक की डिलीवरी दर्ज है, वो असल में रायगढ़ से बाहर गए ही नहीं।
एनटीपीसी के भीतर कर्मचारी और ट्रांसपोर्टर की साठगांठ!
एनटीपीसी के अंदरूनी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस गड़बड़ी में कुछ पुराने और प्रभावशाली ठेकेदारों की भी अहम भूमिका है। इसमें दीप तिवारी का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जो वर्षों से एनटीपीसी के विभिन्न ठेकों में सक्रिय रहा है। स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स की भी मिलीभगत बताई जा रही है।
मंत्री ओपी चैधरी के नियमों की हो रही अवहेलना
छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चैधरी द्वारा फ्लाई ऐश के सुरक्षित प्रबंधन और ट्रांसपोर्टेशन को लेकर स्पष्ट और सख्त नियम बनाए गए हैं। लेकिन, जिस तरीका से खेल हो रहा है वह कहीं ना कहीं दर्शाता है कि एनटीपीसी प्रबंधन और ट्रांसपोर्टर्स इन नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।
पर्यावरण विभाग की आधी अधूरी कार्रवाई, जुर्माना सिर्फ लगभग 4 लाख
पर्यावरण विभाग द्वारा आज कलमी गांव के आसपास की गई कार्रवाई में कुछ ट्रकों पर लगभग 4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई ऊँट के मुँह में जीरा जैसी है। घोटाले के मुख्य सरगना अब भी बेखौफ और बेरोकटोक अपना काम जारी रखे हुए हैं। पूरे मामले में प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि ळच्ै डेटा से ट्रकों की आवाजाही ट्रैक की जा सकती है, तो फिर संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? हालात को देखते हुए जरूरी हो गया है कि राज्य सरकार इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।



















