रईस खान के पास से 12 लाख की संपत्ति जब्त, ठगी की रकम से खरीदी थी टाटा नेक्सॉन कार; लैपटॉप, 3 मोबाइल और 1.39 लाख नकद भी बरामद
रायगढ़, 3 नवंबर। शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर रायगढ़ के डॉक्टर से 34 लाख 17 हजार 531 रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ रायगढ़ पुलिस को एक और सफलता मिली है। साइबर थाना पुलिस ने गिरोह के एक और सदस्य रईस खान (31) को मध्यप्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया है। आरोपी ठगी की रकम से लग्जरी कार और अन्य सामान खरीदकर ऐश कर रहा था। पुलिस ने उसके कब्जे से टाटा नेक्सॉन कार, लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और 1 लाख 39 हजार 500 रुपये नकद सहित करीब 12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस मामले में पुलिस पहले ही गिरोह के तीन सदस्यों तरुण नागर, तनीषा पाटिल और ज्योति मालवीय को गिरफ्तार कर चुकी है।
फर्जी पोर्टफोलियो में दिखाते थे लाखों का मुनाफा
मामला जूटमिल थाना क्षेत्र के सोनकरपारा निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा से जुड़ा है। डॉक्टर ने 27 मई 2026 को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी कि मार्च 2025 में मोबाइल फोन के माध्यम से उनका संपर्क सुनील नामक व्यक्ति से हुआ था। उसने शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर स्पार्टन ट्रेड कंपनी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद व्हाट्सऐप पर फर्जी पोर्टफोलियो भेजकर निवेश की रकम पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा।
आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क कर डॉक्टर को निवेश के लिए भरोसे में लिया। 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 34,17,531 रुपये जमा करा लिए गए। शुरुआत में पोर्टफोलियो में अच्छा मुनाफा दिखाया गया, लेकिन जब डॉक्टर ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो पैसे वापस नहीं मिले। उल्टा उनसे और निवेश करने का दबाव बनाया जाने लगा। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। मामले में अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस में अपराध दर्ज किया गया।
100 से 150 फर्जी सिम के जरिए चल रहा था नेटवर्क
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर साइबर थाना पुलिस ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की। जांच में ज्योति मालवीय के नाम पर जारी सिम कार्ड के जरिए ठगी की कड़ियां सामने आईं। पता चला कि उसके नाम पर 23 अन्य मोबाइल सिम भी संचालित थे। पुलिस ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित कॉल सेंटर में दबिश देकर तनीषा पाटिल, विजय नगर से ज्योति मालवीय और परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में ज्योति ने अपने आधार कार्ड से जारी सिम कार्ड गिरोह को उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। उसने तरुण नागर के माध्यम से करीब 100 से 150 सिम कार्ड गिरोह तक पहुंचाए थे। तनीषा भी सिम उपलब्ध कराने में शामिल थी। वहीं रईस खान लोगों को शेयर मार्केट में निवेश की एडवाइजरी देने और डीमैट अकाउंट खुलवाने के नाम पर संपर्क करने का काम करता था।
डॉक्टर को चार बार फोन कर निवेश के लिए फंसाया
पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस रईस खान की तलाश कर रही थी। आखिरकार साइबर थाना पुलिस ने उसे इंदौर के कावेरी परिसर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से इंदौर में शेयर मार्केट एडवाइजरी का काम कर रहा था। वह मुंबई मुख्यालय वाली एक ब्रोकिंग कंपनी में सब-ब्रोकर के रूप में काम करता था।
पुलिस के मुताबिक, रईस खान ने 24 जून 2025 को डॉक्टर दिलीप मिश्रा को चार बार फोन कर डीमैट अकाउंट खुलवाने और शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा दिया था। आरोपी ने अन्य लोगों को भी इसी तरह निवेश के नाम पर ठगी का शिकार बनाया। उसने स्वीकार किया कि ठगी की रकम से नवंबर 2025 में टाटा नेक्सॉन कार सहित मोबाइल और लैपटॉप खरीदे थे।
12 लाख की संपत्ति जब्त, आरोपी जेल भेजा गया
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक टाटा नेक्सॉन कार, एक लैपटॉप, वनप्लस, रियलमी और आईफोन सहित तीन मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड और 1 लाख 39 हजार 500 रुपये नकद जब्त किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
इंदौर न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर आरोपी को रायगढ़ लाया गया और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय सहित साइबर थाना की टीम की अहम भूमिका रही।
एसएसपी की अपील: निवेश से पहले करें सत्यापन
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लोगों से अपील की है कि शेयर ट्रेडिंग और निवेश में अधिक मुनाफे का लालच देने वाले अनजान लोगों पर भरोसा न करें। किसी को भी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या मोबाइल सिम उपलब्ध न कराएं। साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों और उनके पूरे नेटवर्क के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।



















