रायगढ़ में 15 सहायक शिक्षक बर्खास्त, फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाकर हासिल की थी नौकरी

जिला पंचायत सीईओ ने एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश, बरमकेला व सारंगढ़ क्षेत्र में कार्यरत थे शिक्षक, वर्ष 2005 से 2012-13 के बीच हुई भर्ती के दौरान अस्थाई रूप से सर्टीफिकेट बनवा कर लगाए थे, जांच में पकड़े गए

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 15 सहायक शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके साथ ही इनके ऊपर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह शिक्षक फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाकर वर्षों से नौकरी कर रहे थे। इसमें बरमकेला और सारंगढ़ क्षेत्र में कार्यरत शिक्षक शामिल हैं। ऐसे 27 शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की गई थी। जांच में ये दोषी पाए गए हैं। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ कार्रवाई की है।

दरअसल, वर्ष 2005 से 2012-13 के बीच भर्तियां हुई थीं। उस समय तहसीलदार की ओर से जारी अस्थाई जाति प्रमाणपत्र के आधार पर इन्हें नियुक्तियां दे दी गईं। यह सिर्फ 6 माह के लिए वैध होता है। बाद में आवेदक को स्थाई जाति प्रमाणपत्र जमा करना अनिवार्य है। जांच में दोषी पाए गए शिक्षकों ने अपने स्थाई प्रमाणपत्र नहीं जमा किए और नौकरी करते रहे। जांच में पता चला कि यह सभी शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी कर रहे थे।

जनदर्शन कार्यक्रम में की गई थी कलेक्टर से शिकायत
बरमकेला क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति ने जुलाई 2017 में जनदर्शन कार्यक्रम में कलेक्टर से 27 शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की गई थी। इसमें कहा गया था कि शिक्षकोंे ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाई है। इस पर एसडीएम सारंगढ़ को जांच सौंपी गई। जांच में पता चला कि 15 शिक्षक फर्जी जाति प्रमाणपत्र का सहारा लेकर नौकरी कर रहे थे। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला पंचायत सीईओ ऋचा प्रकाश चौधरी ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं।


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