- ट्रेन में महिलाओं ने कराया प्रसव, 1100 से ज्यादा श्रमिकों को लेकर बिलासपुर पहुंची ट्रेन
बिलासपुर/ भिलाई. सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। इसके बावजूद हजारों की संख्या में मजदूर अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर मीलों पैदल सफर तय कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान घर लौट रहे श्रमिकों की जिजीविषा से जुड़ी ये दो कहानियां हैं। एक जो सफर के अंतिम पड़ाव से पहले खुशी देती है और दूसरी जो मीलों सफर तय करने के बाद भी रास्ते में दम तोड़ देती है।
दर्द लिए घर लौट रहे थे, रास्ते में खुशी मिल गई

मुंगेली का राजेंद्र यादव अपनी पत्नी ईश्वरी यादव और डेढ़ साल की छोटी बच्ची को लेकर भोपाल मजदूरी करने गया था। घर लौटने के लिए किसी तरह पत्नी और बच्ची को लेकर हबीबगंज से शनिवार को ट्रेन में बैठा। ट्रेन चली ही थी कि कुछ घंटे बाद पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और नागपुर से पहले ही उसकी डिलीवरी करानी पड़ी। इस दौरान ट्रेन में उसके गांव की बैठी अन्य महिलाओं ने साथ दिया और सुरक्षित प्रसव कराया। बिलासपुर ट्रेन पहुंची तो महिला और बच्ची को एंबुलेंस से सिम्स में भर्ती कराया गया है। यहां दोनों स्वस्थ हैं। पति राजेंद्र ने बताया कि उनको खेती-बाड़ी के लिए गांव लौटना ही था, लेकिन ऐसे फंस जाएंगे- नहीं सोचा था। पत्नी को जब अचानक से दिक्कत हुई तो कुछ समझ नहीं आ रहा था। कोच में बैठी महिलाओं ने बहुत साथ दिया। बेटी हुई है। इतनी तकलीफ के बाद गांव पहुंचने से पहले खुशी मिली है। अब गांव में ही रहेंगे।
भिलाई में प्रवासी मजदूर की संदिग्ध मौत, सड़क किनारे मिला शव

दुर्ग-राजनांदगांव के अंजोरा बाइपास पर रविवार सुबह सड़क किनारे एक प्रवासी मजदूर युवक का शव मिला है। पास में ही बैग और पानी की खाली बोतल भी पड़ी मिली। फिलहाल, शव की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस को संभावना है कि युवक महाराष्ट्र से भिलाई आ रहा था। शरीर पर कहीं चोट के निशान नहीं हैं। ऐसे में तबीयत बिगड़ने से मौत का अंदेशा है।
