रायगढ़, 19 अगस्त2020/ हरेली पर्व पर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने ग्रामीण विकास को नया आयाम देने जिस गोधन न्याय योजना की शुरुआत की थी, उससे अब बड़ी संख्या में लोग जुड़कर आर्थिक लाभ ले रहे हैं। 20 जुलाई को योजना के प्रारम्भ होने से अब तक रायगढ़ जिले में 4022 पशुपालकों से 18 लाख 97 हजार 477 क्ंिवटल गोबर खरीदा जा चुका है। जिसके एवज में किसानों को 37 लाख 94 हजार 954 रुपये की राशि किसानों को मिलेगी। प्रथम किश्त 6 लाख 77 हजार 452 रुपये का भुगतान 05 अगस्त को किया जा चुका है। शेष राशि 31 लाख 17 हजार 502 का भुगतान आज सीधे हितग्राहियों के खाते में किया जायेगा।
गौधन न्याय योजना को छत्तीसगढ़ शासन की दूरगामी सोच विशिष्ट बनाती है जिसके मूल में ग्रामीण परिवेश में उपलब्ध संसाधन व मैन पावर का बेहतर इस्तेमाल कर ग्रामवासियों को अपने गाँव में ही रोजगार उपलब्ध कराना व उनके आर्थिक सुदृढ़ीकरण का मार्ग प्रशस्त करना है। जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिले। यह योजना आर्थिक चक्र का सस्टेनेबल (धारणीय) व दीर्घजीवी मॉडल तैयार करने की क्षमता रखता है। जितने भी पशुपालक हैं उनके पास गोबर हमेशा से ही रहा है। इसकी खूबी से भी लोग भली-भांति परिचित हैं। खाद के रूप में इसका इस्तेमाल कृषि व उद्यानिकी कार्यों में हमेशा से होता रहा है। वर्मी कम्पोस्ट गोबर से खाद निर्माण का वैज्ञानिक तरीका है।
गौधन न्याय योजना इन्ही सब घटकों को एक साथ व्यवस्थित रूप से जोड़कर कार्य करने की पहल है। पहले चरण में गौठानों में समिति के द्वारा गोबर खरीदा जा रहा है। पशुपालकों को इससे सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है। जिले में गोबर खरीदी के आंकड़े को देखें तो पिछले 27 दिनों में औसतन एक पशुपालक को 943 रुपये का फायदा हुआ। वह भी ऐसी चीज से जिसके लिए उसे कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ा और एक पशुपालक होने के नाते आसानी से उसके पास उपलब्ध है।
दूसरे चरण में गौठानों में गौठान समितियों और स्व- सहायता समूह द्वारा इस गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण होगा। इसके लिए वर्मी पिट आदि का निर्माण, वर्मी बेड उपलब्ध कराने जैसा कार्य भी शासन स्तर से किया जा रहा है। 2 से 3 माह में यहां से वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो जायेंगे। जिसका उपयोग कृषि और उद्यानिकी कार्यों में होगा। किसानों के अलावा इन कार्यों से जुड़े शासकीय विभाग भी बड़े खरीददार के रूप में सामने आये हैं।
ग्राम पंचायत हिर्री में पहले से ग्राम्य भारती स्व-सहायता समूह की महिलाएं अप्रैल माह से वर्मी कम्पोस्ट बना के विक्रय कर रही हैं। अभी तक उन्होंने लगभग 50 क्ंिवटल कम्पोस्ट बेचा है। जिसमें से तकरीबन 25 क्ंिवटल तो अकेले वन विभाग ने ही खरीदा है। इसके अलावा 10-10 क्ंिवटल गांव के दो किसानों ने ही खरीद लिया हैए और छोटी मात्रा में कई अन्य किसानों ने भी इस समूह से वर्मी कम्पोस्ट खरीदा है। इन सबसे महिलाओं को लगभग 34 हजार रुपये की आमदनी हुई है। समूह की महिलाएं बताती हैं की पहले अपने स्तर पर ही गोबर की व्यवस्था करनी पड़ रही थी अब गौधन न्याय योजना से गोबर की आवक बढ़ी है तो वर्मी कम्पोस्ट भी बड़ी मात्रा में तैयार होगा। किसानों को अब गांव में ही जैविक खाद मिलने लगेगा जिससे स्वास्थ्य और वातावरण के लिए हितकारी जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। किसानों की पैदावार बढ़ेगी, नए फसलों के उत्पादन को बल मिलेगा। किसान खाद के परिवहन व रसायन युक्त पदार्थों के इस्तेमाल से होने वाले अन्य खतरे की चिंताओं से भी मुक्त होंगे। सबसे बड़ी बात जैविक खाद निर्यात की संभावना भी बढ़ेगी, जो आय का बड़ा स्त्रोत बन सकता है। इस योजना के घटक ग्रामीण परिवेश में हमेशा आसानी से उपलब्ध रहते हैं जो इसकी सस्टेनेबिलिटी व दीर्घजीविता को बढ़ाते हैं।
