रायगढ़, 11 अगस्त2020/ कलेक्टर श्री भीम सिंह ने छत्तीसगढ़ महामारी रोग कोविड-19 विनियम 2020 के विनियम 12 (IX)द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये राज्य में कोविड-19 के संक्रमण के प्रचार के रोकथाम हेतु रक्षात्मक उपायों को अपनाने एवं उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किये जाने हेतु आदेश जारी किया है।
जारी आदेशानुसार सार्वजनिक स्थलों, कार्यालयों, अस्पतालों, बाजारों एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों, गलियों में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति द्वारा मास्क/फेस कवर धारण करना अनिवार्य होगा। कार्यालय/कार्य स्थलों एवं फैक्ट्री आदि में कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति द्वारा मास्क कवर धारण करना एवं दो पहिया तथा चार पहिया वाहन के द्वारा यात्रा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मास्क पहनना अनिवार्य होगा। उपरोक्त हेतु डिस्पोजल मास्क तथा कपड़े के मास्क का प्रयोग किया जा सकता है। फेस कवर/मास्क उपलब्ध न होने की स्थिति में गमछा, रूमाल, दुपट्टा इत्यादि का भी फेस कवर के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, बशर्ते मुंह एवं नाक पूरी तरह से ढंका हो। कपड़े का मास्क, फेस कवर, गमछा, रूमाल, दुपट्टा इत्यादि का पुन: प्रयोग साबुन से अच्छी तरह से साफ किये बिना न किया जाये। सार्वजनिक स्थलों पर थूकना प्रतिबंधित है। होम क्वारेंटीन में रहने वाले व्यक्तियों को शासन द्वारा समय-समय पर जारी होम क्वारेंटीन संबंधी समस्त दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। दुकानों व व्यवसायिक संस्थानों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग /फिजिकल डिस्टेंसिंग संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन कराया जाना अनिवार्य होगा।
कोविड-19 के संक्रमण के रोकथाम एवं नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किये जाने की दशा में महामारी रोग अधिनियम 1897 (1897 का 3)के अधीन निर्मित विनियम के तहत जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा। जिसके तहत सार्वजनिक स्थलों में मास्क/फेस कवर नहीं पहनने की स्थिति में 100 रुपये, होम क्वारेंटीन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किये जाने पर 1000 रुपये, सार्वजनिक स्थलों पर थूकते हुए पाये जाने की स्थिति में 100 रुपये, दुकानों/व्यवसायिक संस्थानों के मालिकों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग/फिजिकल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन किये जाने की स्थिति में 200 रुपये जुर्मांना किया जाएगा। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध महामारी रोग अधिनियम 1897 (1897 का 3) के अधीन निर्मित विनियम, 2020 के विनियम 14 एवं भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45)की धारा 188 के अंतर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।
