डब्ल्यूएचओ ने कहा कि विश्व की कई सरकारों ने सामाजिक कल्याण के लिए कुछ अच्छे कदम उठाए और ये सुनिश्चित किया कि उन लोगों को खाने-पीने और दूसरी जरूरी वस्तुओं की दिक्कत न हो जो इस संकट के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं.
उन्होंने इसके लिए भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम मोदी ने 24 अरब डॉलर के पैकेज का एलान किया है. इसमें लोगों को खाने का मुफ्त राशन देने से लेकर 204 मिलियन गरीब महिलाओं को सीधा कैश ट्रांसफर करने जैसे फैसले बेहतरीन हैं. इसके अलावा अगले 3 महीनों के लिए देश के 8 करोड़ परिवारों के लिए मुफ्त कुकिंग गैस का सरकार का एलान लोगों को सीधा मदद पहुंचाएगा जिसकी इस संकट के समय में बहुत जरूरत थी.
हालांकि उन्होंने कई विकासशील देशों के लिए कहा कि कई विकासशील देश इस तरह के सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों को लागू कर पाने में विफल साबित हो रहे हैं. लोगों की अच्छी देखभाल करने और आर्थिक ढांचे को ढहने से रोकने के लिए ऐसे देशों को कर्जों से मुक्ति पाने की बेहद बड़ी जरूरत है.
पहले भी जताया था भारत पर भरोसा
बता दें कि 23-24 मार्च के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने उम्मीद जताई थी कि भारत कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई की अगुवाई करे. डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का भविष्य काफी हद तक इस बात से तय होगा कि भारत जैसे घनी आबादी वाले और बड़े मुल्क क्या कदम उठाते हैं.
