यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानी UPSC की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं.उन्होंने लोक सेवा आयोगों से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित किताब का लोकार्पण किया.इसके साथ ही उन्होंने शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी किया.2025 में UPSC की ओर से कराई गई परीक्षाओं में 10 से 12 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था. इनमें 9 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने सिविल सर्विस परीक्षा का फॉर्म भरा था.
पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 1952 में यूपीएससी परीक्षा में महिलाओं का प्रतिशत सिर्फ 3 फीसदी था जो आज बढकर 30% हो चुका है.इसी तरह उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि यूपीएससी के इतिहास में अब तक चार वुमेन चेयरपर्सन रही हैं जिसमें से तीन वुमेन चेयरपर्सन 2014 के बाद बनी हैं.उन्होंने कहा कि ये बदलाव सिर्फ आंकडें नहीं हैं बल्कि यह बताते हैं कि अवसर कितना है.
1926 में रखी गई थी संस्था की नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1926 में जब इस संस्थान की नींव रखी गई थी, तब इसकी व्यवस्था कुछ अलग थी.उन्होंने कहा कि देश आजाद हुआ और आजाद भारत के सपने तथा भारत की व्यवस्था केंद्र में रहे UPSC ने अपने दायित्वों को बेहतरीन तरीके से निभाया है.उन्होंने कहा कि इतिहास से आगे बढ़कर हमारे सामने भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है. 21वीं सदी का एक क्वार्टर बीत चुका है और आने वाले 25 साल भारत के लिए व्यक्ति और संस्था के लिए विशेष हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए जिस तरह की गवर्नेंस देश को चाहिए.उसका बहुत बड़ा माध्यम UPSC और राज्यों के चयन आयोग हैं.उन्होंने कहा कि आज युवाओं की भर्ती की जा रही है और ये युवा विकसित भारत में अहम भूमिका निभाएंगे.पीएम मोदी ने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए दो कसौटियों को हमेशा याद रखना है.पहली कसौटी-नेशन फर्स्ट और दूसरी सिटीजन फर्स्ट है.उन्होंने कहा कि इन्हीं दो कसौटियों पर हर सेलेक्शन को कसा जा रहा है.इसी भाव से भरे कैंडिडेट्स का सेलेक्शन होगा तो राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति आसान हो जाएगी.
2047 का भारत आज के भारत से अलग होगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 का भारत आज के भारत से अलग होगा. उन्होंने कहा कि हमारे नागरिकों, खासकर युवाओं के एक्सपीरियंस बदल रहे हैं.उन्होंने कहा कि आज सवाल सिर्फ सर्विस डिलीवरी का नहीं है, बल्कि डिलीवरी वाली गति को पकड़ने का भी है.
AI के दौर में भर्ती प्रक्रिया पर भी सोचने की जरूरत
पीएम मोदी ने कहा कि जब AI कुछ ही डॉक्यूमेंट्स को कुछ ही क्षणों में चेक कर सकता है तो नागरिक समाधान चाहता है. उन्होंने इसके साथ सेलेक्शन पैरामीटर और रिक्रूटमेंट प्रोसेस की बात भी रखी. उन्होंने कहा कि हमें ऐसे युवाओं को पब्लिक सर्विस में लाना होगा जो पब्लिक ऑफिस से नहीं, बल्कि पब्लिक सर्विस के लिए आकर्षित हों.उन्होंने यह भी सवाल रखा कि कैंडिडेट कितना जानता है और वह युवा सिविल सर्विसेज में आना क्यों चाहता है यह जानना जरूरी है.इसके साथ उन्होंने बदलती जनआकांक्षाओं के साथ चयन प्रक्रिया को देखने की जरूरत पर बात रखी.
युवाओं की भूमिका को लेकर PM मोदी ने रखी बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत के लिए व्यक्ति और संस्थाओं की भूमिका विशेष है. UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों के जरिए जिन युवाओं का चयन हो रहा है वे भविष्य के भारत की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चयन प्रक्रिया में ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’ की कसौटी को ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में काम किया जा सके.
30 सितंबर से दो दिवसीय शताब्दी समारोह
UPSC का शताब्दी समारोह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है. पहले दिन भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह- मंथन’ कार्यक्रम हुआ. इसमें कई विषयों पर चर्चा और पैनल आयोजित किए गए.कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC के अधिकारी शामिल हुए.
संविधान के अनुच्छेद 315 में है UPSC का प्रावधान
UPSC एक संवैधानिक संस्था है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 315 में किया गया है. परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न कई विशेषज्ञों की मदद से तैयार किए जाते हैं.उत्तर पुस्तिकाओं में कोडिंग की व्यवस्था होती है.इसका मकसद यह है कि जांच के दौरान परीक्षक को उम्मीदवार का नाम और रोल नंबर पता न चले.इंटरव्यू के दौरान भी उम्मीदवार की व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखी जाती है.


















